Tuesday, August 12, 2008

तू जो हरजाई है अपना भी यही तौर सही ;
तू नहीं और सही और नहीं, और सही!!!

एक और यूँ फ़रमाया है ...

वक़्त ने वो ख़ाक उड़ाई है के दिल के दश्त से 
क़ाफ़िले गुज़रे हैं फिर भी नक़्श-ए-पा कोई नहीं !!!

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